बुधवार, 20 अप्रैल 2016

३.३९ यश

यः सर्वभूतप्रशमे निविष्टः सत्यो मृदुर्मानकृच्छुद्धभावः।
अतीव स ज्ञायते ज्ञातिमध्ये महामणिर्जात्य इव प्रसन्नः।।३.३९।।

जो मनुष्य सभी लोगों को शांति प्रदान करने वाले कार्यों को करता है , सत्य बोलता है , कोमल हृदय वाला है , दूसरों का आदर करता है , शुद्ध विचार वाला होता है , वह अच्छी खान से निकले हुए और चमकते हुए रत्न के समान अपनी जाति वालों में यश प्राप्त करता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें